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बंगाल में यदि राष्टपति शासन नहीं लगा, देखिये हिन्दूयों की संख्या कैसे कम होती जायेगी

हिंदुत्व की शुरुआत बंगाल से हुई है। क्योंकि बंगाल (Bengal) पहले से एक ऐसा राज्य है। जिसका विभा जन धर्म के आधार पर 1905 में हुआ था। पूर्वी इलाकों के मुस लमान पूर्वी क्षेत्र के लिए एक अलग राजनीति पार्टी की मांग कर रहे थे। जहां वे संपूर्ण बहुमत में थे। लेकिन प्रतिनिधित्व करने वाले लोग बहुत कम थे। सरकारी सेवाओं से लेकर नए-नए व्यवसाय में हिंदुओं का प्रभुत्व था। एक विशेष समाज में शिक्षा की कमी होने के कारण अंग्रेजों ने बेहद आसानी से हिंदू बहुसंख्यक और मु स्लिम बहुमत को पूर्वी और पश्चिमी हिस्से में अलग कर दिया था। हालांकि 1911 में वे फिर से एक हो गए थे। आज के समय में अगर बंगाल राज्य में राष्ट्रपति शासन नही लगा, तो हिन्दू विलुप्त हो जाएंगे। क्योंकि ममता का खेल जारी है।

बंगाल धार्मिक रूप से अभी भी आ जाद नहीं

1911 में ही हिंदुत्व की शुरुआत हुई थी। बंगाल के हिंदू यह महसूस कर रहे थे कि उनकी जनसंख्या अधिक होने के बावजूद भी उन्हें बराबरी का दर्जा नहीं मिल रहा था। क्योंकि उस समय एक विशेष धर्म के लोग उनके पक्ष में नहीं थे। खासकर पूर्वी बंगाल (East Bengal) के लोग। हम धीरे-धीरे यह देखते आ रहे हैं कि बंगाल में आज भी मुस लमानों का ही बोलबाला है। अगर इस पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो, ये लोग एक दिन हमारे सर चढ़कर बोलेंगे। आज के समय में भी यह प्रासंगिक है कि देश की आजादी के बाद भी बंगाल राज्य धार्मिक रूप से अभी तक आ जाद नहीं हुआ है।

बंगाल में मिल रहा एक विशेष धर्म को बढ़ावा

2016 में जब ममता बनर्जी (Mamta Banerjee) दूसरी बार चुनाव जीतने के बाद सत्ता का निर्वहन कर रही थी। तब भी एक विशेष धर्म को ही अधिक लाभ मिल रहा था। बीते 5 सालों में बंगाल के हिंदुओं ने ये सब अपनी आंखों से देखा है। ममता बनर्जी के राज में हिंदुओं को सरस्वती पूजा तक मनाने की इजाजत नहीं दी जाती। वहीं दूसरी तरफ एक विशेष समुदाय के लोग खुलकर ताजिया निकालते हैं और उ त्पात मचाते हैं, यह कहां तक उचित है। कोई शां तिपूर्ण त्यौहार को नहीं मना सकता है और एक विशेष समाज के लोग हर त्यौहार को खुलकर मना सकता है।

बंगाल से असम में पलायन कर रहे हैं लोग

बीते 2 हफ्ते पहले पश्चिम बंगाल (West Bengal) में हिंदुओं की रक्षा को लेकर मांग करने वाली एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी। जिसे स्वीकार कर लिया गया था। जनहित याचिका के मुताबिक बंगाल से पलायन कर रहे लोग असम में जाकर बस रहे हैं। इस पर बंगाल सरकार को ध्यान देने की जरूरत है। अपना घर–बार छोड़ना आसान नहीं होता। बंगाल में भी ठीक वैसा ही हो रहा है जैसा 1990 में कश्मीर में हिंदुओं के साथ हुआ था। बहुत सारे कश्मीरी पंडित कश्मीर से पलायन कर गए थे।

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